श्रीभगवानुवाच
ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम्
छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित्
ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम्
छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित्
śrībhagavānuvāca .ūrdhvamūlamadhaḥśākhamaśvatthaṃ prāhuravyayam .chandāṃsi yasya parṇāni yastaṃ veda sa vedavit
English Translation
Shree Bhagavan said: He who knows the pipal tree; which is said to be imperishable, having its root above and branches below, and whose leaves are the Vedas—he alone knows the Vedas.
हिन्दी अनुवाद
श्रीभगवान ने कहा—आदि पुरुष परमेश्वर रूप मूल वाले और ब्रह्मा रूप मुख्य शाखा वाले जिस संसार रूप पीपल के वृक्ष को अविनाशी कहते हैं; तथा वेद जिसके पत्ते कहे गये हैं—उस संसार रूप वृक्ष को जो पुरुष मूल सहित तत्व से जानता है, वह वेद के तात्पर्य को जानने वाला है |
Morphemic Decomposition & Padaccheda
ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं
ऊर्ध्व [adj]
ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं
मूल [mn]
ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं
अधस् [ind]
ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं
शाखा [f]
ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं
अश्वत्थ [m]
प्राहुरव्ययम्
प्राह् [1. P.]
प्राहुरव्ययम्
अव्यय [adj]
छन्दांसि
छन्दस् [n]
यस्य
यद् [pron]
पर्णानि
पर्ण [mn]
यस्तं
यद् [pron]
यस्तं
तद् [pron]
वेद
विद् [6. Ā.]
स
तद् [pron]
वेदवित्
वेद [m]
वेदवित्
विद् [adj]