Ādiparva Adhyāya 189
आदिपर्व • अध्यायः 189
Ādiparva Adhyāya 189 of the classical Mahābhārata with 50 verses.
Total: 50 Verses
•
Citations: MBh 1.189.1–50
•
250 Lexicon Terms
•
Page 1 of 2 (Verses 30 shown)
पुरा वै नैमिषारण्ये देवाः सत्रमुपासते । तत्र वैवस्वतो राजञ्शामित्रमकरोत्तदा ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
पुरा
पुरा [ind]
वै
वै [ind]
नैमिषारण्ये
नैमिष [n]
नैमिषारण्ये
अरण्य [n]
देवाः
देव [m]
सत्रम्
सत्त्र [n]
उपासते
उपास् [4. P.]
तत्र
तत्र [ind]
वैवस्वतो
वैवस्वत [m]
राजञ्
राजन् [m]
शामित्रम्
शामित्र [m]
अकरोत्
कृ [2. Ā.]
तदा
तदा [ind]
ततो यमो दीक्षितस्तत्र राज;न्नामारयत्किंचिदपि प्रजाभ्यः । ततः प्रजास्ता बहुला बभूवुः; कालातिपातान्मरणात्प्रहीणाः ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
ततो
ततस् [ind]
यमो
यम [m]
दीक्षितस्तत्र
दीक्षित [m]
दीक्षितस्तत्र
तत्र [ind]
राजन्
राजन् [m]
नामारयत्
न [ind]
नामारयत्
मारय् [10. Ā.]
किंचिद्
कश्चित् [pron]
अपि
अपि [ind]
प्रजाभ्यः
प्रजा [f]
ततः
ततस् [ind]
प्रजास्ता
प्रजा [f]
प्रजास्ता
तद् [pron]
बहुला
बहुल [adj]
बभूवुः
भू [1. Ā.]
कालातिपातान्
काल [m]
कालातिपातान्
अतिपात [m]
मरणात्
मरण [n]
प्रहीणाः
प्रहा [3. Ā.]
ततस्तु शक्रो वरुणः कुबेरः; साध्या रुद्रा वसवश्चाश्विनौ च । प्रणेतारं भुवनस्य प्रजापतिं; समाजग्मुस्तत्र देवास्तथान्ये ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
ततस्तु
ततस् [ind]
ततस्तु
तु [ind]
शक्रो
शक्र [m]
वरुणः
वरुण [m]
कुबेरः
कुबेर [m]
साध्या
साध्य [m]
रुद्रा
रुद्र [m]
वसवश्चाश्विनौ
वसु [mn]
वसवश्चाश्विनौ
च [ind]
वसवश्चाश्विनौ
अश्विन् [m]
च
च [ind]
प्रणेतारं
प्रणेतृ [m]
भुवनस्य
भुवन [n]
प्रजापतिं
प्रजापति [m]
समाजग्मुस्तत्र
समागम् [6. P.]
समाजग्मुस्तत्र
तत्र [ind]
देवास्तथान्ये
देव [m]
देवास्तथान्ये
तथा [ind]
देवास्तथान्ये
अन्य [pron]
ततोऽब्रुवँल्लोकगुरुं समेता; भयं नस्तीव्रं मानुषाणां विवृद्ध्या । तस्माद्भयादुद्विजन्तः सुखेप्सवः; प्रयाम सर्वे शरणं भवन्तम् ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
ततो
ततस् [ind]
ऽब्रुवंल्लोकगुरुं
ब्रू [2. Ā.]
ऽब्रुवंल्लोकगुरुं
लोक [m]
ऽब्रुवंल्लोकगुरुं
गुरु [m]
समेता
समे [2. P.]
भयं
भय [n]
नस्तीव्रं
मद् [pron]
नस्तीव्रं
तीव्र [adj]
मानुषाणां
मानुष [m]
विवृद्ध्या
विवृद्धि [f]
तस्माद्
तद् [pron]
भयाद्
भय [n]
उद्विजन्तः
उद्विज् [6. P.]
सुखेप्सवः
सुख [n]
सुखेप्सवः
ईप्सु [adj]
प्रयाम
प्रया [2. Ā.]
सर्वे
सर्व [pron]
शरणं
शरण [n]
भवन्तम्
भवत् [adj]
किं वो भयं मानुषेभ्यो यूयं सर्वे यदामराः । मा वो मर्त्यसकाशाद्वै भयं भवतु कर्हिचित् ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
किं
क [pron]
वो
त्वद् [pron]
भयं
भय [n]
मानुषेभ्यो
मानुष [m]
यूयं
त्वद् [pron]
सर्वे
सर्व [pron]
यदामराः
यदा [ind]
यदामराः
अमर [m]
मा
मा [ind]
वो
त्वद् [pron]
मर्त्यसकाशाद्
मर्त्य [m]
मर्त्यसकाशाद्
सकाश [m]
वै
वै [ind]
भयं
भय [n]
भवतु
भू [1. Ā.]
कर्हिचित्
कर्हिचित् [ind]
मर्त्या ह्यमर्त्याः संवृत्ता न विशेषोऽस्ति कश्चन । अविशेषादुद्विजन्तो विशेषार्थमिहागताः ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
मर्त्या
मर्त्य [m]
ह्यमर्त्याः
हि [ind]
ह्यमर्त्याः
अमर्त्य [adj]
संवृत्ता
संवृत् [1. Ā.]
न
न [ind]
विशेषो
विशेष [m]
ऽस्ति
अस् [2. P.]
कश्चन
कश्चन [pron]
अविशेषाद्
अविशेष [m]
उद्विजन्तो
उद्विज् [6. P.]
विशेषार्थम्
विशेष [m]
विशेषार्थम्
अर्थ [mn]
इहागताः
इह [ind]
इहागताः
आगम् [6. P.]
वैवस्वतो व्यापृतः सत्रहेतो;स्तेन त्विमे न म्रियन्ते मनुष्याः । तस्मिन्नेकाग्रे कृतसर्वकार्ये; तत एषां भवितैवान्तकालः ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
वैवस्वतो
वैवस्वत [m]
व्यापृतः
व्यापृत [adj]
सत्रहेतोस्
सत्त्र [n]
सत्रहेतोस्
हेतु [m]
तेन
तद् [pron]
त्विमे
तु [ind]
त्विमे
इदम् [pron]
न
न [ind]
म्रियन्ते
मृ [4. Ā.]
मनुष्याः
मनुष्य [m]
तस्मिन्न्
तद् [pron]
एकाग्रे
एकाग्र [adj]
कृतसर्वकार्ये
कृ [2. Ā.]
कृतसर्वकार्ये
सर्व [pron]
कृतसर्वकार्ये
कार्य [n]
तत
ततस् [ind]
एषां
इदम् [pron]
भवितैवान्तकालः
भू [1. Ā.]
भवितैवान्तकालः
एव [ind]
भवितैवान्तकालः
अन्तकाल [m]
वैवस्वतस्यापि तनुर्विभूता; वीर्येण युष्माकमुत प्रयुक्ता । सैषामन्तो भविता ह्यन्तकाले; तनुर्हि वीर्यं भविता नरेषु ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
वैवस्वतस्यापि
वैवस्वत [m]
वैवस्वतस्यापि
अपि [ind]
तनुर्
तनु [f]
विभूता
विभू [1. P.]
वीर्येण
वीर्य [n]
युष्माकम्
त्वद् [pron]
उत
उत [ind]
प्रयुक्ता
प्रयुज् [7. Ā.]
सैषाम्
तद् [pron]
सैषाम्
इदम् [pron]
अन्तो
अन्त [m]
भविता
भू [1. Ā.]
ह्यन्तकाले
हि [ind]
ह्यन्तकाले
अन्तकाल [m]
तनुर्
तनु [f]
हि
हि [ind]
वीर्यं
वीर्य [n]
भविता
भू [1. Ā.]
नरेषु
नर [m]
ततस्तु ते पूर्वजदेववाक्यं; श्रुत्वा देवा यत्र देवा यजन्ते । समासीनास्ते समेता महाबला; भागीरथ्यां ददृशुः पुण्डरीकम् ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
ततस्तु
ततस् [ind]
ततस्तु
तु [ind]
ते
तद् [pron]
पूर्वजदेववाक्यं
पूर्व [pron]
पूर्वजदेववाक्यं
ज [adj]
पूर्वजदेववाक्यं
देव [m]
पूर्वजदेववाक्यं
वाक्य [n]
श्रुत्वा
श्रु [4. P.]
देवा
देव [m]
यत्र
यत्र [ind]
देवा
देव [m]
यजन्ते
यज् [2. P.]
समासीनास्ते
समास् [4. P.]
समासीनास्ते
तद् [pron]
समेता
समे [2. P.]
महाबला
महत् [adj]
महाबला
बल [mn]
भागीरथ्यां
भागीरथी [f]
ददृशुः
दृश् [6. P.]
पुण्डरीकम्
पुण्डरीक [n]
दृष्ट्वा च तद्विस्मितास्ते बभूवु;स्तेषामिन्द्रस्तत्र शूरो जगाम । सोऽपश्यद्योषामथ पावकप्रभां; यत्र गङ्गा सततं संप्रसूता ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
दृष्ट्वा
दृश् [6. P.]
च
च [ind]
तद्
तद् [pron]
विस्मितास्ते
विस्मि [1. P.]
विस्मितास्ते
तद् [pron]
बभूवुस्
भू [1. Ā.]
तेषाम्
तद् [pron]
इन्द्रस्तत्र
इन्द्र [m]
इन्द्रस्तत्र
तत्र [ind]
शूरो
शूर [m]
जगाम
गम् [6. Ā.]
सो
तद् [pron]
ऽपश्यद्
पश् [4. Ā.]
योषाम्
योषा [f]
अथ
अथ [ind]
पावकप्रभां
पावक [m]
पावकप्रभां
प्रभा [f]
यत्र
यत्र [ind]
गङ्गा
गङ्गा [f]
सततं
सततम् [ind]
सम्प्रसूता
सम्प्रसू [4. P.]
सा तत्र योषा रुदती जलार्थिनी; गङ्गां देवीं व्यवगाह्यावतिष्ठत् । तस्याश्रुबिन्दुः पतितो जले वै; तत्पद्ममासीदथ तत्र काञ्चनम् ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
सा
तद् [pron]
तत्र
तत्र [ind]
योषा
योषा [f]
रुदती
रुद् [1. P.]
जलार्थिनी
जल [n]
जलार्थिनी
अर्थिन् [adj]
गङ्गां
गङ्गा [f]
देवीं
देवी [f]
व्यवगाह्यावतिष्ठत्
व्यवगाह् [1. Ā.]
व्यवगाह्यावतिष्ठत्
अवस्था [1. Ā.]
तस्याश्रुबिन्दुः
तद् [pron]
तस्याश्रुबिन्दुः
अश्रु [mn]
तस्याश्रुबिन्दुः
बिन्दु [mn]
पतितो
पत् [1. Ā.]
जले
जल [n]
वै
वै [ind]
तत्
तद् [pron]
पद्मम्
पद्म [mn]
आसीद्
अस् [2. P.]
अथ
अथ [ind]
तत्र
तत्र [ind]
काञ्चनम्
काञ्चन [adj]
तदद्भुतं प्रेक्ष्य वज्री तदानी;मपृच्छत्तां योषितमन्तिकाद्वै । का त्वं कथं रोदिषि कस्य हेतो;र्वाक्यं तथ्यं कामयेह ब्रवीहि ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
तद्
तद् [pron]
अद्भुतं
अद्भुत [n]
प्रेक्ष्य
प्रेक्ष् [1. P.]
वज्री
वज्रिन् [m]
तदानीम्
तदानीम् [ind]
अपृच्छत्
प्रच्छ् [1. P.]
तां
तद् [pron]
योषितम्
योषित् [f]
अन्तिकाद्
अन्तिक [n]
वै
वै [ind]
का
क [pron]
त्वं
त्वद् [pron]
कथं
कथम् [ind]
रोदिषि
रुद् [1. P.]
कस्य
क [pron]
हेतोर्
हेतु [m]
वाक्यं
वाक्य [n]
तथ्यं
तथ्य [adj]
कामयेह
कामया [ind]
कामयेह
इह [ind]
ब्रवीहि
ब्रू [2. Ā.]
त्वं वेत्स्यसे मामिह यास्मि शक्र; यदर्थं चाहं रोदिमि मन्दभाग्या । आगच्छ राजन्पुरतोऽहं गमिष्ये; द्रष्टासि तद्रोदिमि यत्कृतेऽहम् ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
त्वं
त्वद् [pron]
वेत्स्यसे
विद् [2. Ā.]
माम्
मद् [pron]
इह
इह [ind]
यास्मि
यद् [pron]
यास्मि
अस् [2. P.]
शक्र
शक्र [m]
यदर्थं
यद् [pron]
यदर्थं
अर्थ [mn]
चाहं
च [ind]
चाहं
मद् [pron]
रोदिमि
रुद् [1. P.]
मन्दभाग्या
मन्दभाग्य [adj]
आगच्छ
आगम् [6. P.]
राजन्
राजन् [m]
पुरतो
पुरतस् [ind]
ऽहं
मद् [pron]
गमिष्ये
गम् [6. Ā.]
द्रष्टासि
दृश् [6. P.]
तद्
तद् [pron]
रोदिमि
रुद् [1. P.]
यत्कृते
यत्कृते [ind]
ऽहम्
मद् [pron]
तां गच्छन्तीमन्वगच्छत्तदानीं; सोऽपश्यदारात्तरुणं दर्शनीयम् । सिंहासनस्थं युवतीसहायं; क्रीडन्तमक्षैर्गिरिराजमूर्ध्नि ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
तां
तद् [pron]
गच्छन्तीम्
गम् [6. Ā.]
अन्वगच्छत्
अनुगम् [1. Ā.]
तदानीं
तदानीम् [ind]
सो
तद् [pron]
ऽपश्यद्
पश् [4. Ā.]
आरात्
आरात् [ind]
तरुणं
तरुण [adj]
दर्शनीयम्
दर्शनीय [adj]
सिंहासनस्थं
सिंहासन [n]
सिंहासनस्थं
स्थ [adj]
युवतीसहायं
युवती [f]
युवतीसहायं
सहाय [m]
क्रीडन्तम्
क्रीड् [1. Ā.]
अक्षैर्
अक्ष [m]
गिरिराजमूर्ध्नि
गिरि [m]
गिरिराजमूर्ध्नि
राजन् [m]
गिरिराजमूर्ध्नि
मूर्धन् [m]
तमब्रवीद्देवराजो ममेदं; त्वं विद्धि विश्वं भुवनं वशे स्थितम् । ईशोऽहमस्मीति समन्युरब्रवी;द्दृष्ट्वा तमक्षैः सुभृशं प्रमत्तम् ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
तम्
तद् [pron]
अब्रवीद्
ब्रू [2. Ā.]
देवराजो
देवराज [m]
ममेदं
मद् [pron]
ममेदं
इदम् [pron]
त्वं
त्वद् [pron]
विद्धि
विद् [6. Ā.]
विश्वं
विश्व [pron]
भुवनं
भुवन [n]
वशे
वश [m]
स्थितम्
स्था [1. Ā.]
ईशो
ईश [m]
ऽहम्
मद् [pron]
अस्मीति
अस् [2. P.]
अस्मीति
इति [ind]
समन्युर्
समन्यु [adj]
अब्रवीद्
ब्रू [2. Ā.]
दृष्ट्वा
दृश् [6. P.]
तम्
तद् [pron]
अक्षैः
अक्ष [m]
सुभृशं
सु [ind]
सुभृशं
भृशम् [ind]
प्रमत्तम्
प्रमद् [4. Ā.]
क्रुद्धं तु शक्रं प्रसमीक्ष्य देवो; जहास शक्रं च शनैरुदैक्षत । संस्तम्भितोऽभूदथ देवराज;स्तेनेक्षितः स्थाणुरिवावतस्थे ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
क्रुद्धं
क्रुध् [4. Ā.]
तु
तु [ind]
शक्रं
शक्र [m]
प्रसमीक्ष्य
प्रसमीक्ष् [1. Ā.]
देवो
देव [m]
जहास
हस् [1. Ā.]
शक्रं
शक्र [m]
च
च [ind]
शनैर्
शनैस् [ind]
उदैक्षत
उदीक्ष् [1. P.]
संस्तम्भितो
संस्तम्भय् [10. Ā.]
ऽभूद्
भू [1. Ā.]
अथ
अथ [ind]
देवराजस्
देवराज [m]
तेनेक्षितः
तद् [pron]
तेनेक्षितः
ईक्ष् [4. P.]
स्थाणुर्
स्थाणु [mn]
इवावतस्थे
इव [ind]
इवावतस्थे
अवस्था [1. Ā.]
यदा तु पर्याप्तमिहास्य क्रीडया; तदा देवीं रुदतीं तामुवाच । आनीयतामेष यतोऽहमारा;न्मैनं दर्पः पुनरप्याविशेत ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
यदा
यदा [ind]
तु
तु [ind]
पर्याप्तम्
पर्याप् [5. Ā.]
इहास्य
इह [ind]
इहास्य
इदम् [pron]
क्रीडया
क्रीडा [f]
तदा
तदा [ind]
देवीं
देवी [f]
रुदतीं
रुद् [1. P.]
ताम्
तद् [pron]
उवाच
वच् [2. P.]
आनीयताम्
आनी [1. Ā.]
एष
एतद् [pron]
यतो
यतस् [ind]
ऽहम्
मद् [pron]
आरान्
आरात् [ind]
मैनं
मद् [pron]
मैनं
एनद् [pron]
दर्पः
दर्प [m]
पुनर्
पुनर् [ind]
अप्याविशेत
अपि [ind]
अप्याविशेत
आविश् [6. Ā.]
ततः शक्रः स्पृष्टमात्रस्तया तु; स्रस्तैरङ्गैः पतितोऽभूद्धरण्याम् । तमब्रवीद्भगवानुग्रतेजा; मैवं पुनः शक्र कृथाः कथंचित् ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
ततः
ततस् [ind]
शक्रः
शक्र [m]
स्पृष्टमात्रस्तया
स्पृश् [6. Ā.]
स्पृष्टमात्रस्तया
मात्र [n]
स्पृष्टमात्रस्तया
तद् [pron]
तु
तु [ind]
स्रस्तैर्
स्रंस् [1. P.]
अङ्गैः
अङ्ग [n]
पतितो
पति [m]
ऽभूद्
भू [1. Ā.]
धरण्याम्
धरणी [f]
तम्
तद् [pron]
अब्रवीद्
ब्रू [2. Ā.]
भगवान्
भगवन्त् [m]
उग्रतेजा
उग्र [adj]
उग्रतेजा
तेजस् [n]
मैवं
मा [ind]
मैवं
एवम् [ind]
पुनः
पुनर् [ind]
शक्र
शक्र [m]
कृथाः
कृ [2. Ā.]
कथंचित्
कथंचिद् [ind]
विवर्तयैनं च महाद्रिराजं; बलं च वीर्यं च तवाप्रमेयम् । विवृत्य चैवाविश मध्यमस्य; यत्रासते त्वद्विधाः सूर्यभासः ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
विवर्तयैनं
विवर्तय् [10. P.]
विवर्तयैनं
एनद् [pron]
च
च [ind]
महाद्रिराजं
महत् [adj]
महाद्रिराजं
अद्रि [m]
महाद्रिराजं
राज [m]
बलं
बल [mn]
च
च [ind]
वीर्यं
वीर्य [n]
च
च [ind]
तवाप्रमेयम्
त्वद् [pron]
तवाप्रमेयम्
अप्रमेय [adj]
विवृत्य
विवृ [9. P.]
चैवाविश
च [ind]
चैवाविश
एव [ind]
चैवाविश
आविश् [6. Ā.]
मध्यम्
मध्य [n]
अस्य
इदम् [pron]
यत्रासते
यत्र [ind]
यत्रासते
आस् [4. P.]
त्वद्विधाः
त्वद्विध [adj]
सूर्यभासः
सूर्य [m]
सूर्यभासः
भास् [fn]
स तद्विवृत्य शिखरं महागिरे;स्तुल्यद्युतींश्चतुरोऽन्यान्ददर्श । स तानभिप्रेक्ष्य बभूव दुःखितः; कच्चिन्नाहं भविता वै यथेमे ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
स
तद् [pron]
तद्
तद् [pron]
विवृत्य
विवृ [9. P.]
शिखरं
शिखर [mn]
महागिरेस्
महत् [adj]
महागिरेस्
गिरि [m]
तुल्यद्युतींश्चतुरो
तुल्य [adj]
तुल्यद्युतींश्चतुरो
द्युति [f]
तुल्यद्युतींश्चतुरो
चतुर् [nr]
ऽन्यान्
अन्य [pron]
ददर्श
दृश् [6. P.]
स
तद् [pron]
तान्
तद् [pron]
अभिप्रेक्ष्य
अभिप्रेक्ष् [1. P.]
बभूव
भू [1. Ā.]
दुःखितः
दुःखित [adj]
कच्चिन्
कश्चित् [pron]
नाहं
न [ind]
नाहं
मद् [pron]
भविता
भू [1. Ā.]
वै
वै [ind]
यथेमे
यथा [ind]
यथेमे
इदम् [pron]
ततो देवो गिरिशो वज्रपाणिं; विवृत्य नेत्रे कुपितोऽभ्युवाच । दरीमेतां प्रविश त्वं शतक्रतो; यन्मां बाल्यादवमंस्थाः पुरस्तात् ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
ततो
ततस् [ind]
देवो
देव [m]
गिरिशो
गिरिश [m]
वज्रपाणिं
वज्रपाणि [m]
विवृत्य
विवृत् [1. Ā.]
नेत्रे
नेत्र [mn]
कुपितो
कुप् [4. Ā.]
ऽभ्युवाच
अभिवच् [3. P.]
दरीम्
दरी [f]
एतां
एतद् [pron]
प्रविश
प्रविश् [4. P.]
त्वं
त्वद् [pron]
शतक्रतो
शतक्रतु [m]
यन्
यद् [pron]
मां
मद् [pron]
बाल्याद्
बाल्य [n]
अवमंस्थाः
अवमन् [4. P.]
पुरस्तात्
पुरस्तात् [ind]
उक्तस्त्वेवं विभुना देवराजः; प्रवेपमानो भृशमेवाभिषङ्गात् । स्रस्तैरङ्गैरनिलेनेव नुन्न;मश्वत्थपत्रं गिरिराजमूर्ध्नि ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
उक्तस्त्वेवं
वच् [2. P.]
उक्तस्त्वेवं
तु [ind]
उक्तस्त्वेवं
एवम् [ind]
विभुना
विभु [adj]
देवराजः
देवराज [m]
प्रवेपमानो
प्रविप् [1. Ā.]
भृशम्
भृशम् [ind]
एवाभिषङ्गात्
एव [ind]
एवाभिषङ्गात्
अभिषङ्ग [m]
स्रस्तैर्
स्रंस् [1. P.]
अङ्गैर्
अङ्ग [n]
अनिलेनेव
अनिल [m]
अनिलेनेव
इव [ind]
नुन्नम्
नुद् [2. P.]
अश्वत्थपत्रं
अश्वत्थ [m]
अश्वत्थपत्रं
पत्त्र [mn]
गिरिराजमूर्ध्नि
गिरि [m]
गिरिराजमूर्ध्नि
राजन् [m]
गिरिराजमूर्ध्नि
मूर्धन् [m]
स प्राञ्जलिर्विनतेनाननेन; प्रवेपमानः सहसैवमुक्तः । उवाच चेदं बहुरूपमुग्रं; द्रष्टा शेषस्य भगवंस्त्वं भवाद्य ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
स
तद् [pron]
प्राञ्जलिर्
प्राञ्जलि [adj]
विनतेनाननेन
विनम् [1. Ā.]
विनतेनाननेन
आनन [n]
प्रवेपमानः
प्रविप् [1. Ā.]
सहसैवम्
सहस् [n]
सहसैवम्
एवम् [ind]
उक्तः
वच् [2. P.]
उवाच
वच् [2. P.]
चेदं
च [ind]
चेदं
इदम् [pron]
बहुरूपम्
बहु [adj]
बहुरूपम्
रूप [n]
उग्रं
उग्र [adj]
द्रष्टा
दृश् [6. P.]
शेषस्य
शेष [mn]
भगवंस्त्वं
भगवन्त् [m]
भगवंस्त्वं
त्वद् [pron]
भवाद्य
भू [1. Ā.]
भवाद्य
अद्य [ind]
तमब्रवीदुग्रधन्वा प्रहस्य; नैवंशीलाः शेषमिहाप्नुवन्ति । एतेऽप्येवं भवितारः पुरस्ता;त्तस्मादेतां दरिमाविश्य शेध्वम् ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
तम्
तद् [pron]
अब्रवीद्
ब्रू [2. Ā.]
उग्रधन्वा
उग्रधन्वन् [m]
प्रहस्य
प्रहस् [1. Ā.]
नैवंशीलाः
न [ind]
नैवंशीलाः
एवंशील [adj]
शेषम्
शेष [mn]
इहाप्नुवन्ति
इह [ind]
इहाप्नुवन्ति
आप् [1. P.]
एते
एतद् [pron]
ऽप्येवं
अपि [ind]
ऽप्येवं
एवम् [ind]
भवितारः
भू [1. Ā.]
पुरस्तात्
पुरस्तात् [ind]
तस्माद्
तद् [pron]
एतां
एतद् [pron]
दरीम्
दरी [f]
आविश्य
आविश् [6. Ā.]
शेषोऽप्येवं भविता वो न संशयो; योनिं सर्वे मानुषीमाविशध्वम् । तत्र यूयं कर्म कृत्वाविषह्यं; बहूनन्यान्निधनं प्रापयित्वा ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
शेषो
शेष [mn]
ऽप्येवं
अपि [ind]
ऽप्येवं
एवम् [ind]
भविता
भू [1. Ā.]
वो
त्वद् [pron]
न
न [ind]
संशयो
संशय [m]
योनिं
योनि [mf]
सर्वे
सर्व [pron]
मानुषीम्
मानुष [adj]
आविशध्वम्
आविश् [6. Ā.]
तत्र
तत्र [ind]
यूयं
त्वद् [pron]
कर्म
कर्मन् [n]
कृत्वाविषह्यं
कृ [2. Ā.]
कृत्वाविषह्यं
अविषह्य [adj]
बहून्
बहु [adj]
अन्यान्
अन्य [pron]
निधनं
निधन [mn]
प्रापयित्वा
प्रापय् [10. Ā.]
आगन्तारः पुनरेवेन्द्रलोकं; स्वकर्मणा पूर्वजितं महार्हम् । सर्वं मया भाषितमेतदेवं; कर्तव्यमन्यद्विविधार्थवच्च ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
आगन्तारः
आगम् [6. P.]
पुनर्
पुनर् [ind]
एवेन्द्रलोकं
एव [ind]
एवेन्द्रलोकं
इन्द्र [m]
एवेन्द्रलोकं
लोक [m]
स्वकर्मणा
स्व [adj]
स्वकर्मणा
कर्मन् [n]
पूर्वजितं
पूर्व [pron]
पूर्वजितं
जि [9. P.]
महार्हम्
महार्ह [adj]
सर्वं
सर्व [pron]
मया
मद् [pron]
भाषितम्
भाष् [1. P.]
एतद्
एतद् [pron]
एवं
एवम् [ind]
कर्तव्यम्
कृ [2. Ā.]
अन्यद्
अन्य [pron]
विविधार्थवच्च
विविध [adj]
विविधार्थवच्च
अर्थवत् [adj]
विविधार्थवच्च
च [ind]
गमिष्यामो मानुषं देवलोका;द्दुराधरो विहितो यत्र मोक्षः । देवास्त्वस्मानादधीरञ्जनन्यां; धर्मो वायुर्मघवानश्विनौ च ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
गमिष्यामो
गम् [6. Ā.]
मानुषं
मानुष [adj]
देवलोकाद्
देव [m]
देवलोकाद्
लोक [m]
दुराधरो
दुराधर [adj]
विहितो
विधा [3. Ā.]
यत्र
यत्र [ind]
मोक्षः
मोक्ष [m]
देवास्त्वस्मान्
देव [m]
देवास्त्वस्मान्
तु [ind]
देवास्त्वस्मान्
मद् [pron]
आदधीरञ्
आधा [3. Ā.]
जनन्यां
जननी [f]
धर्मो
धर्म [mn]
वायुर्
वायु [m]
मघवान्
मघवन् [m]
अश्विनौ
अश्विन् [m]
च
च [ind]
एतच्छ्रुत्वा वज्रपाणिर्वचस्तु; देवश्रेष्ठं पुनरेवेदमाह । वीर्येणाहं पुरुषं कार्यहेतो;र्दद्यामेषां पञ्चमं मत्प्रसूतम् ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
एतच्छ्रुत्वा
एतद् [pron]
एतच्छ्रुत्वा
श्रु [4. P.]
वज्रपाणिर्
वज्रपाणि [m]
वचस्तु
वचस् [n]
वचस्तु
तु [ind]
देवश्रेष्ठं
देव [m]
देवश्रेष्ठं
श्रेष्ठ [adj]
पुनर्
पुनर् [ind]
एवेदम्
एव [ind]
एवेदम्
इदम् [pron]
आह
अह् [1. P.]
वीर्येणाहं
वीर्य [n]
वीर्येणाहं
मद् [pron]
पुरुषं
पुरुष [m]
कार्यहेतोर्
कार्य [n]
कार्यहेतोर्
हेतु [m]
दद्याम्
दा [1. Ā.]
एषां
इदम् [pron]
पञ्चमं
पञ्चम [adj]
मत्प्रसूतम्
मद् [pron]
मत्प्रसूतम्
प्रसू [2. P.]
तेषां कामं भगवानुग्रधन्वा; प्रादादिष्टं सन्निसर्गाद्यथोक्तम् । तां चाप्येषां योषितं लोककान्तां; श्रियं भार्यां व्यदधान्मानुषेषु ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
तेषां
तद् [pron]
कामं
कामम् [ind]
भगवान्
भगवन्त् [m]
उग्रधन्वा
उग्रधन्वन् [m]
प्रादाद्
प्रदा [3. Ā.]
इष्टं
इष् [1. P.]
सन्निसर्गाद्
सन्निसर्ग [m]
यथोक्तम्
यथोक्तम् [ind]
तां
तद् [pron]
चाप्येषां
च [ind]
चाप्येषां
अपि [ind]
चाप्येषां
इदम् [pron]
योषितं
योषित् [f]
लोककान्तां
लोक [m]
लोककान्तां
कान्त [adj]
श्रियं
श्री [f]
भार्यां
भार्या [f]
व्यदधान्
विधा [3. Ā.]
मानुषेषु
मानुष [m]