Ādiparva Adhyāya 93
आदिपर्व • अध्यायः 93
Ādiparva Adhyāya 93 of the classical Mahābhārata with 47 verses.
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आपवो नाम को न्वेष वसूनां किं च दुष्कृतम् । यस्याभिशापात्ते सर्वे मानुषीं तनुमागताः ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
आपवो
आपव [m]
नाम
नाम [ind]
को
क [pron]
न्वेष
नु [ind]
न्वेष
एतद् [pron]
वसूनां
वसु [mn]
किं
क [pron]
च
च [ind]
दुष्कृतम्
दुष्कृत [n]
यस्याभिशापात्
यद् [pron]
यस्याभिशापात्
अभिशाप [m]
ते
तद् [pron]
सर्वे
सर्व [pron]
मानुषीं
मानुष [adj]
तनुम्
तनु [f]
आगताः
आगम् [6. P.]
अनेन च कुमारेण गङ्गादत्तेन किं कृतम् । यस्य चैव कृतेनायं मानुषेषु निवत्स्यति ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
अनेन
इदम् [pron]
च
च [ind]
कुमारेण
कुमार [m]
गङ्गादत्तेन
गङ्गा [f]
गङ्गादत्तेन
दा [1. Ā.]
किं
क [pron]
कृतम्
कृ [2. Ā.]
यस्य
यद् [pron]
चैव
च [ind]
चैव
एव [ind]
कृतेनायं
कृत [n]
कृतेनायं
इदम् [pron]
मानुषेषु
मानुष [m]
निवत्स्यति
निवस् [1. Ā.]
ईशानाः सर्वलोकस्य वसवस्ते च वै कथम् । मानुषेषूदपद्यन्त तन्ममाचक्ष्व जाह्नवि ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
ईशानाः
ईशान [m]
सर्वलोकस्य
सर्व [pron]
सर्वलोकस्य
लोक [m]
वसवस्ते
वसु [mn]
वसवस्ते
तद् [pron]
च
च [ind]
वै
वै [ind]
कथम्
कथम् [ind]
मानुषेषूदपद्यन्त
मानुष [m]
मानुषेषूदपद्यन्त
उत्पद् [4. P.]
तन्
तद् [pron]
ममाचक्ष्व
मद् [pron]
ममाचक्ष्व
आचक्ष् [1. P.]
जाह्नवि
जाह्नवी [f]
सैवमुक्ता ततो गङ्गा राजानमिदमब्रवीत् । भर्तारं जाह्नवी देवी शंतनुं पुरुषर्षभम् ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
सैवम्
तद् [pron]
सैवम्
एवम् [ind]
उक्ता
वच् [2. P.]
ततो
ततस् [ind]
गङ्गा
गङ्गा [f]
राजानम्
राजन् [m]
इदम्
इदम् [pron]
अब्रवीत्
ब्रू [2. Ā.]
भर्तारं
भर्तृ [m]
जाह्नवी
जाह्नवी [f]
देवी
देवी [f]
शंतनुं
शंतनु [m]
पुरुषर्षभम्
पुरुष [m]
पुरुषर्षभम्
ऋषभ [m]
यं लेभे वरुणः पुत्रं पुरा भरतसत्तम । वसिष्ठो नाम स मुनिः ख्यात आपव इत्युत ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
यं
यद् [pron]
लेभे
लभ् [1. P.]
वरुणः
वरुण [m]
पुत्रं
पुत्र [m]
पुरा
पुरा [ind]
भरतसत्तम
भरत [m]
भरतसत्तम
सत्तम [adj]
वसिष्ठो
वसिष्ठ [m]
नाम
नाम [ind]
स
तद् [pron]
मुनिः
मुनि [m]
ख्यात
ख्या [4. P.]
आपव
आपव [m]
इत्युत
इति [ind]
इत्युत
उत [ind]
तस्याश्रमपदं पुण्यं मृगपक्षिगणान्वितम् । मेरोः पार्श्वे नगेन्द्रस्य सर्वर्तुकुसुमावृतम् ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
आश्रमप्रवरं
आश्रम [mn]
आश्रमप्रवरं
प्रवर [adj]
पुण्यं
पुण्य [adj]
महर्षिगणसेवितम्
महत् [adj]
महर्षिगणसेवितम्
ऋषि [m]
महर्षिगणसेवितम्
गण [m]
महर्षिगणसेवितम्
सेव् [4. P.]
मेरोः
मेरु [m]
पार्श्वे
पार्श्व [mn]
नगेन्द्रस्य
नग [m]
नगेन्द्रस्य
इन्द्र [m]
सर्वर्तुकुसुमावृतम्
सर्व [pron]
सर्वर्तुकुसुमावृतम्
ऋतु [m]
सर्वर्तुकुसुमावृतम्
कुसुम [n]
सर्वर्तुकुसुमावृतम्
आवृ [5. Ā.]
स वारुणिस्तपस्तेपे तस्मिन्भरतसत्तम । वने पुण्यकृतां श्रेष्ठः स्वादुमूलफलोदके ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
स
तद् [pron]
वारुणिस्तपस्तेपे
वारुणि [m]
वारुणिस्तपस्तेपे
तपस् [n]
वारुणिस्तपस्तेपे
तप् [4. Ā.]
तस्मिन्
तद् [pron]
भरतसत्तम
भरत [m]
भरतसत्तम
सत्तम [adj]
वने
वन [n]
पुण्यकृतां
पुण्य [adj]
पुण्यकृतां
कृत् [adj]
श्रेष्ठः
श्रेष्ठ [adj]
स्वादुमूलफलोदके
स्वादु [adj]
स्वादुमूलफलोदके
मूल [mn]
स्वादुमूलफलोदके
फल [n]
स्वादुमूलफलोदके
उदक [n]
दक्षस्य दुहिता या तु सुरभीत्यतिगर्विता । गां प्रजाता तु सा देवी कश्यपाद्भरतर्षभ ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
दक्षस्य
दक्ष [m]
दुहिता
दुहितृ [f]
या
यद् [pron]
तु
तु [ind]
गां
गो [mf]
प्रजाता
प्रजन् [4. P.]
तु
तु [ind]
सा
तद् [pron]
देवी
देवी [f]
कश्यपाद्
कश्यप [m]
भरतर्षभ
भरत [m]
भरतर्षभ
ऋषभ [m]
अनुग्रहार्थं जगतः सर्वकामदुघां वराम् । तां लेभे गां तु धर्मात्मा होमधेनुं स वारुणिः ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
अनुग्रहार्थं
अनुग्रह [m]
अनुग्रहार्थं
अर्थ [mn]
जगतः
जगन्त् [n]
सर्वकामदुघां
सर्व [pron]
सर्वकामदुघां
कामदुघा [f]
वराम्
वर [adj]
तां
तद् [pron]
लेभे
लभ् [1. P.]
गां
गो [mf]
तु
तु [ind]
धर्मात्मा
धर्म [mn]
धर्मात्मा
आत्मन् [m]
होमधेनुं
होमधेनु [f]
स
तद् [pron]
वारुणिः
वारुणि [m]
सा तस्मिंस्तापसारण्ये वसन्ती मुनिसेविते । चचार रम्ये धर्म्ये च गौरपेतभया तदा ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
सा
तद् [pron]
तस्मिंस्तापसारण्ये
तद् [pron]
तस्मिंस्तापसारण्ये
तापस [m]
तस्मिंस्तापसारण्ये
अरण्य [n]
वसन्ती
वस् [2. P.]
मुनिसेविते
मुनि [m]
मुनिसेविते
सेव् [4. P.]
चचार
चर् [1. Ā.]
रम्ये
रम्य [adj]
धर्म्ये
धर्म्य [adj]
च
च [ind]
गौर्
गो [mf]
अपेतभया
अपे [2. Ā.]
अपेतभया
भय [n]
तदा
तदा [ind]
अथ तद्वनमाजग्मुः कदाचिद्भरतर्षभ । पृथ्वाद्या वसवः सर्वे देवदेवर्षिसेवितम् ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
अथ
अथ [ind]
तद्
तद् [pron]
वनम्
वन [n]
आजग्मुः
आगम् [6. P.]
कदाचिद्
कदाचिद् [ind]
भरतर्षभ
भरत [m]
भरतर्षभ
ऋषभ [m]
पृथ्वाद्या
पृथु [m]
पृथ्वाद्या
आद्य [adj]
वसवः
वसु [mn]
सर्वे
सर्व [pron]
देवदेवर्षिसेवितम्
देव [m]
देवदेवर्षिसेवितम्
देवर्षि [m]
देवदेवर्षिसेवितम्
सेव् [4. P.]
ते सदारा वनं तच्च व्यचरन्त समन्ततः । रेमिरे रमणीयेषु पर्वतेषु वनेषु च ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
ते
तद् [pron]
सदारा
स [ind]
सदारा
दार [mn]
वनं
वन [n]
तच्च
तद् [pron]
तच्च
च [ind]
व्यचरन्त
विचर् [1. Ā.]
समन्ततः
समन्ततः [ind]
रेमिरे
रम् [4. Ā.]
रमणीयेषु
रमणीय [adj]
पर्वतेषु
पर्वत [mn]
वनेषु
वन [n]
च
च [ind]
तत्रैकस्य तु भार्या वै वसोर्वासवविक्रम । सा चरन्ती वने तस्मिन्गां ददर्श सुमध्यमा । या सा वसिष्ठस्य मुनेः सर्वकामधुगुत्तमा ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
तत्रैकस्य
तत्र [ind]
तत्रैकस्य
एक [pron]
तु
तु [ind]
भार्या
भार्या [f]
वै
वै [ind]
वसोर्
वसु [mn]
वासवविक्रम
वासव [m]
वासवविक्रम
विक्रम [m]
सा
तद् [pron]
चरन्ती
चर् [1. Ā.]
वने
वन [n]
तस्मिन्
तद् [pron]
गां
गो [mf]
ददर्श
दृश् [6. P.]
सुमध्यमा
सुमध्यमा [f]
या
यद् [pron]
सा
तद् [pron]
वसिष्ठस्य
वसिष्ठ [m]
मुनेः
मुनि [m]
सर्वकामधुग्
सर्व [pron]
सर्वकामधुग्
कामदुह् [f]
उत्तमा
उत्तम [adj]
सा विस्मयसमाविष्टा शीलद्रविणसंपदा । दिवे वै दर्शयामास तां गां गोवृषभेक्षण ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
सा
तद् [pron]
विस्मयसमाविष्टा
विस्मय [m]
विस्मयसमाविष्टा
समाविश् [6. Ā.]
शीलद्रविणसंपदा
शील [mn]
शीलद्रविणसंपदा
द्रविण [n]
शीलद्रविणसंपदा
सम्पद् [f]
दिवे
दिव् [m]
वै
वै [ind]
दर्शयामास
दर्शय् [10. Ā.]
तां
तद् [pron]
गां
गो [mf]
गोवृषभेक्षण
गो [mf]
गोवृषभेक्षण
वृषभ [m]
गोवृषभेक्षण
ईक्षण [n]
स्वापीनां च सुदोग्ध्रीं च सुवालधिमुखां शुभाम् । उपपन्नां गुणैः सर्वैः शीलेनानुत्तमेन च ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
स्वापीनां
स्वापि [m]
च
च [ind]
सुदोग्ध्रीं
सुदोग्धृ [adj]
च
च [ind]
सुवालधिमुखां
सुवालधि [adj]
सुवालधिमुखां
मुख [n]
शुभाम्
शुभ [adj]
उपपन्नां
उपपद् [4. P.]
गुणैः
गुण [mn]
सर्वैः
सर्व [pron]
शीलेनानुत्तमेन
शील [mn]
शीलेनानुत्तमेन
अनुत्तम [adj]
च
च [ind]
एवंगुणसमायुक्तां वसवे वसुनन्दिनी । दर्शयामास राजेन्द्र पुरा पौरवनन्दन ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
एवंगुणसमायुक्तं
एवंगुण [adj]
एवंगुणसमायुक्तं
समायुज् [7. P.]
ददर्श
दृश् [6. P.]
स
तद् [pron]
वनं
वन [n]
नृपः
नृप [m]
दर्शयामास
दर्शय् [10. Ā.]
राजेन्द्र
राजन् [m]
राजेन्द्र
इन्द्र [m]
पुरा
पुरा [ind]
पौरवनन्दन
पौरव [m]
पौरवनन्दन
नन्दन [m]
द्यौस्तदा तां तु दृष्ट्वैव गां गजेन्द्रेन्द्रविक्रम । उवाच राजंस्तां देवीं तस्या रूपगुणान्वदन् ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
द्यौस्तदा
दिव् [m]
द्यौस्तदा
तदा [ind]
तां
तद् [pron]
तु
तु [ind]
दृष्ट्वैव
दृश् [6. P.]
दृष्ट्वैव
एव [ind]
गां
गो [mf]
गजेन्द्रेन्द्रविक्रम
गज [m]
गजेन्द्रेन्द्रविक्रम
इन्द्र [m]
गजेन्द्रेन्द्रविक्रम
इन्द्र [m]
गजेन्द्रेन्द्रविक्रम
विक्रम [m]
उवाच
वच् [2. P.]
राजंस्तां
राजन् [m]
राजंस्तां
तद् [pron]
देवीं
देवी [f]
नृपोत्तम
नृप [m]
नृपोत्तम
उत्तम [adj]
सुमध्यमाम्
सुमध्यमा [f]
एषा गौरुत्तमा देवि वारुणेरसितेक्षणे । ऋषेस्तस्य वरारोहे यस्येदं वनमुत्तमम् ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
एषा
एतद् [pron]
गौर्
गो [mf]
उत्तमा
उत्तम [adj]
देवि
देवी [f]
वारुणेर्
वारुणि [m]
असितेक्षणे
असित [adj]
असितेक्षणे
ईक्षण [n]
ऋषेस्तस्य
ऋषि [m]
ऋषेस्तस्य
तद् [pron]
वरारोहे
वरारोह [adj]
यस्येदं
यद् [pron]
यस्येदं
इदम् [pron]
वनम्
वन [n]
उत्तमम्
उत्तम [adj]
अस्याः क्षीरं पिबेन्मर्त्यः स्वादु यो वै सुमध्यमे । दश वर्षसहस्राणि स जीवेत्स्थिरयौवनः ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
अस्याः
इदम् [pron]
क्षीरं
क्षीर [n]
पिबेन्
पा [1. Ā.]
मर्त्यः
मर्त्य [m]
स्वादु
स्वादु [adj]
यो
यद् [pron]
वै
वै [ind]
सुमध्यमे
सुमध्यमा [f]
दश
दशन् [adj]
वर्षसहस्राणि
वर्ष [mn]
वर्षसहस्राणि
सहस्र [mn]
स
तद् [pron]
जीवेत्
जीव् [1. Ā.]
स्थिरयौवनः
स्थिर [adj]
स्थिरयौवनः
यौवन [n]
एतच्छ्रुत्वा तु सा देवी नृपोत्तम सुमध्यमा । तमुवाचानवद्याङ्गी भर्तारं दीप्ततेजसम् ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
उवाच
वच् [2. P.]
राजंस्तां
राजन् [m]
राजंस्तां
तद् [pron]
देवीं
देवी [f]
नृपोत्तम
नृप [m]
नृपोत्तम
उत्तम [adj]
सुमध्यमाम्
सुमध्यमा [f]
तम्
तद् [pron]
उवाचानवद्याङ्गी
वच् [2. P.]
उवाचानवद्याङ्गी
अनवद्य [adj]
उवाचानवद्याङ्गी
अङ्ग [adj]
भर्तारं
भर्तृ [m]
दीप्ततेजसम्
दीप् [4. P.]
दीप्ततेजसम्
तेजस् [n]
अस्ति मे मानुषे लोके नरदेवात्मजा सखी । नाम्ना जिनवती नाम रूपयौवनशालिनी ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
अस्ति
अस् [2. P.]
मे
मद् [pron]
मानुषे
मानुष [adj]
लोके
लोक [m]
नरदेवात्मजा
नर [m]
नरदेवात्मजा
देव [m]
नरदेवात्मजा
आत्मजा [f]
सखी
सखी [f]
नाम्ना
नामन् [n]
जिनवती
जिनवती [f]
नाम
नाम [ind]
रूपयौवनशालिनी
रूप [n]
रूपयौवनशालिनी
यौवन [n]
रूपयौवनशालिनी
शालिन् [adj]
उशीनरस्य राजर्षेः सत्यसंधस्य धीमतः । दुहिता प्रथिता लोके मानुषे रूपसंपदा ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
उशीनरस्य
उशीनर [m]
राजर्षेः
राजर्षि [m]
सत्यसंधस्य
सत्य [adj]
सत्यसंधस्य
संधा [f]
धीमतः
धीमत् [adj]
दुहिता
दुहितृ [f]
प्रथिता
प्रथ् [1. P.]
लोके
लोक [m]
मानुषे
मानुष [adj]
रूपसंपदा
रूप [n]
रूपसंपदा
सम्पद् [f]
तस्या हेतोर्महाभाग सवत्सां गां ममेप्सिताम् । आनयस्वामरश्रेष्ठ त्वरितं पुण्यवर्धन ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
तस्या
तद् [pron]
हेतोर्
हेतु [m]
महाभाग
महाभाग [adj]
सवत्सां
स [ind]
सवत्सां
वत्स [m]
गां
गो [mf]
ममेप्सिताम्
मद् [pron]
ममेप्सिताम्
ईप्सय् [Desid. Ā.]
आनयस्वामरश्रेष्ठ
आनी [1. Ā.]
आनयस्वामरश्रेष्ठ
अमर [m]
आनयस्वामरश्रेष्ठ
श्रेष्ठ [adj]
त्वरितं
त्वर् [1. P.]
पुण्यवर्धन
पुण्य [adj]
पुण्यवर्धन
वर्धन [adj]
यावदस्याः पयः पीत्वा सा सखी मम मानद । मानुषेषु भवत्वेका जरारोगविवर्जिता ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
यावद्
यावत् [ind]
अस्याः
इदम् [pron]
पयः
पयस् [n]
पीत्वा
पा [1. Ā.]
सा
तद् [pron]
सखी
सखी [f]
मम
मद् [pron]
मानद
मानद [adj]
मानुषेषु
मानुष [m]
भवत्वेका
भू [1. Ā.]
भवत्वेका
एक [pron]
जरारोगविवर्जिता
जरा [f]
जरारोगविवर्जिता
रोग [mn]
जरारोगविवर्जिता
विवर्जय् [10. Ā.]
एतन्मम महाभाग कर्तुमर्हस्यनिन्दित । प्रियं प्रियतरं ह्यस्मान्नास्ति मेऽन्यत्कथंचन ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
एतन्
एतद् [pron]
मम
मद् [pron]
महाभाग
महाभाग [adj]
कर्तुम्
कृ [2. Ā.]
अर्हस्यनिन्दित
अर्ह् [1. Ā.]
अर्हस्यनिन्दित
अनिन्दित [adj]
प्रियं
प्रिय [adj]
प्रियतरं
प्रियतर [adj]
ह्यस्मान्
हि [ind]
ह्यस्मान्
इदम् [pron]
नास्ति
न [ind]
नास्ति
अस् [2. P.]
मे
मद् [pron]
ऽन्यत्
अन्य [pron]
कथंचन
कथंचन [ind]
एतच्छ्रुत्वा वचस्तस्या देव्याः प्रियचिकीर्षया । पृथ्वाद्यैर्भ्रातृभिः सार्धं द्यौस्तदा तां जहार गाम् ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
एतच्छ्रुत्वा
एतद् [pron]
एतच्छ्रुत्वा
श्रु [4. P.]
वचस्तस्या
वचस् [n]
वचस्तस्या
तद् [pron]
देव्याः
देवी [f]
प्रियचिकीर्षया
प्रिय [n]
प्रियचिकीर्षया
चिकीर्षा [f]
पृथ्वाद्यैर्
पृथु [m]
पृथ्वाद्यैर्
आद्य [adj]
भ्रातृभिः
भ्रातृ [m]
सार्धं
सार्धम् [ind]
द्यौस्तदा
दिव् [m]
द्यौस्तदा
तदा [ind]
तां
तद् [pron]
जहार
हृ [2. P.]
गाम्
गो [mf]
तया कमलपत्राक्ष्या नियुक्तो द्यौस्तदा नृप । ऋषेस्तस्य तपस्तीव्रं न शशाक निरीक्षितुम् । हृता गौः सा तदा तेन प्रपातस्तु न तर्कितः ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
तया
तद् [pron]
कमलपत्राक्ष्या
कमल [mn]
कमलपत्राक्ष्या
पत्त्र [mn]
कमलपत्राक्ष्या
अक्ष [adj]
नियुक्तो
नियुज् [7. Ā.]
द्यौस्तदा
दिव् [m]
द्यौस्तदा
तदा [ind]
नृप
नृप [m]
ऋषेस्तस्य
ऋषि [m]
ऋषेस्तस्य
तद् [pron]
तपस्तीव्रं
तपस् [n]
तपस्तीव्रं
तीव्र [adj]
न
न [ind]
शशाक
शक् [4. P.]
निरीक्षितुम्
निरीक्ष् [1. P.]
हृता
हृ [2. P.]
गौः
गो [mf]
सा
तद् [pron]
तदा
तदा [ind]
तेन
तद् [pron]
प्रपातस्तु
प्रपात [m]
प्रपातस्तु
तु [ind]
न
न [ind]
तर्कितः
तर्कय् [Denom. Ā.]
अथाश्रमपदं प्राप्तः फलान्यादाय वारुणिः । न चापश्यत गां तत्र सवत्सां काननोत्तमे ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
अथाश्रमपदं
अथ [ind]
अथाश्रमपदं
आश्रम [mn]
अथाश्रमपदं
पद [mn]
प्राप्तः
प्राप् [1. P.]
फलान्यादाय
फल [n]
फलान्यादाय
आदा [4. Ā.]
वारुणिः
वारुणि [m]
न
न [ind]
चापश्यत
च [ind]
चापश्यत
पश् [4. Ā.]
गां
गो [mf]
तत्र
तत्र [ind]
सवत्सां
स [ind]
सवत्सां
वत्स [m]
काननोत्तमे
कानन [n]
काननोत्तमे
उत्तम [adj]
ततः स मृगयामास वने तस्मिंस्तपोधनः । नाध्यगच्छच्च मृगयंस्तां गां मुनिरुदारधीः ॥
Morphemic Decomposition & Padaccheda
ततः
ततस् [ind]
स
तद् [pron]
मृगयामास
मृगय् [Denom. P.]
वने
वन [n]
तस्मिंस्तपोधनः
तद् [pron]
तस्मिंस्तपोधनः
तपोधन [adj]
नाध्यगच्छच्च
न [ind]
नाध्यगच्छच्च
अधिगम् [1. Ā.]
नाध्यगच्छच्च
च [ind]
मृगयंस्तां
मृगय् [Denom. P.]
मृगयंस्तां
तद् [pron]
गां
गो [mf]
मुनिर्
मुनि [m]
उदारधीः
उदार [adj]
उदारधीः
धी [f]