Skip to main content
Search
Ch. 15 RV 15.13
Full Chapter
RV • Chapter 15: Canto 15

RV 15.13

Canonical Ref: RV 15.13
Metrical Form: अनुष्टुप्
Sanskrit (Devanāgarī)
तस्यामेवस्य यामिन्यामन्तर्वत्नी प्रजावती । सुतावसूत संपन्नौ कोशदण्डाविव क्षितिः ॥
व्याख्या / Traditional Commentary & Notes Classical Exegesis
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः): तस्यामिति॥ तस्यामेव यामिन्यां रात्रौ। अस्य शत्रुघ्नस्य। अन्तरस्या अस्तीत्यन्तर्वत्नी गर्भिणी `अन्तर्वत्नी च गर्भिणी` इत्यमरः (अ.को.2|6|22)। `अन्तर्वत्पतिवतोर्मुक्` (पा.4।1।32) इति ङीप्, नुगागमश्च। प्रजावती भ्रातृजाया सीता। क्षितिः संपन्नौ समग्रौ कोशदण्डाविव। सुतावसूत ॥
Canonical CTS URN Reference
Raghuvaṁśam, RV 15.13. Poorvam Open Research Engine (PORE) Corpus.
← Previous Verse (RV 15.12) All Verses in Chapter 15 Next Verse (RV 15.14) →