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विक्रमसंवत् २०८३
शुक्रवासरः · ३० अक्तूबर २०२६
आनुपूर्वी संस्कृतम्
✦ अतीतानागतयोः सन्धौ ✦
आगामी कार्यक्रमः 31 Oct 2026
Exploring the Place of Devotion: Siting and Experiencing Divinity in Bengal-Vaishnavism
Sukanya Sarbadhikary
पाण्डुलिपिः प्रेष्यताम्

बाल गोपाल को प्रातः काल उठाने के लिए— जागो लाल

यह पद वात्सल्य और भक्ति के भाव से कृष्ण को प्रातःकाल जगाने की मधुर पुकार है। बालकृष्ण की चंचल क्रीड़ा, मंद मुस्कान और मनोहर रूप के माध्यम से भक्त का आत्मीय प्रेम अभिव्यक्त होता है। सूर्य, प्रभात और गृहस्थ जीवन के बिम्ब कृष्ण के प्रति स्नेह, समर्पण और अंतरंग भक्ति को उजागर करते हैं।
बाल गोपाल को प्रातः काल उठाने के लिए— जागो लाल
AIयह चित्र प्रतीकात्मक है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की सहायता से निर्मित है
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कविता

जागो लाल

ओ लाल हमारे जाग जियौ रे,
ओ लाल हमारे जाग जियौ रे।
भास्कर तेज बरस रे,
प्रातःकाल होत उठी जाए।
ओ लाल हमारे जाग जियौ रे।
खात-कुदत सुखी रैन का बालगोपाल,
हमारे मन को भाए।
क्रीड़ा करत मुस्काए,
मेरा जियो भर आए।
ओ लाल हमारे, कृष्ण हमारे,
ओ लाल हमारे जाग जियौ रे।
मोर मन को भावे,
चांद मुस्काय सो गयो रे।
सूरज प्रखर होये,
जाग जियौ रे माधव,
प्रातःकाल होत उठी जाए रे।
ओ लाल हमारे जाग जियौ रे।
सुंदर मुस्कानिया छेड़ दो रे,
ओ लाल हमारे जाग जियौ रे।
मारे मन मोहना, जाग जियौ रे,
जाग लो रे।
घीरोट खाए,
मंद-मंद मुस्कान रे।
जाग कृष्ण हमारे,
ओ लाल हमारे जाग जियौ रे।
जागो लाल हमारे,
साँवरी सेठ अब उठी जावे,
मोरे मन सों प्रीत भावे,
जागो लाल हमारे।
ओ लाल हमारे उठी जाग जियौ रे,
गुलितकंद तुम्हारे अंग पे सजा दे रे,
ओ लाल हमारे जाग जियौ रे।
प्रातः समय होत,
क्रीड़ा करत नाचत,
मेरे मन भावे,
मंद मंद मुस्काए,
जागो म्हारे लाल दुलारे,
भास्कर प्रखर देत,
ओ लाल हमारे,
जागो लाल हमारे।
अपने मुख से हाँक दुवारे,
ओ लाल नंदकिशोर, जाग अब म्हारे नटखट लाल रे,
ओ लाल हमारे जाग जियौ रे।
S
लेखक-परिचयः
परिचयः →

Sohan Sanap

सर्वाधिकारः अनुमतिश्च: इयं रचना CC BY-NC-ND 4.0 अनुमत्या प्रकाशिता अस्ति। मूललेखकस्य नाम्नः ‘आनुपूर्वी’-पत्रिकायाः च उल्लेखेन सह अवाणिज्यिक-उपयोगाय मुक्ता वर्तते।
महत्त्वपूर्णा उद्घोषणा: अत्र प्रकाशितानि लेखकानाम्, अतिथीनां च मतानि तेषाम् एव सन्ति; तानि Poorvam-संस्थायाः नीतयः न प्रतिविम्बयन्ति।