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Ch. 6 RV 6.20
Full Chapter
RV • Chapter 6: Canto 6

RV 6.20

Canonical Ref: RV 6.20
Metrical Form: उपजातिः
Sanskrit (Devanāgarī)
ततो नृपाणां श्रुतवृत्तवंशा पुंवत्प्रगल्भा प्रतिहाररक्षी । प्राक्संनिकर्षं मगधेश्वरस्य नीत्वा कुमारीमवदत्सुनन्दा ॥
व्याख्या / Traditional Commentary & Notes Classical Exegesis
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः): तत इति॥ ततोऽनन्तरं नृपाणां श्रुतवृत्तवंशा। श्रुतवृत्तावंशेत्यर्थः। सापेक्षत्वेऽपि गमकत्वात्समासः। प्रगल्भा वाग्मिनी सुनन्दा सुनन्दाख्या प्रतिहारं रक्षतीति प्रतिहाररक्षी द्वारपालिका। कर्मण्यण्प्रत्ययः। `टिड्ढाणञ्-` (पा.4।1।15) इत्यादिना ङीप्। प्राक् प्रथमं कुमारीमिन्दुमतीं मगधेश्वरस्य संनिकर्षं समीपं नीत्वा पुंवत् पुंसा तुल्यम्। `तेन तुल्यं क्रिया चेद्वतिः` (पा.5।1।115) इति वतिप्रत्ययः। अवदत् ॥
Canonical CTS URN Reference
Raghuvaṁśam, RV 6.20. Poorvam Open Research Engine (PORE) Corpus.
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