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Ch. 19 RV 19.51
Full Chapter
RV • Chapter 19: Canto 19

RV 19.51

Canonical Ref: RV 19.51
Metrical Form: रथोद्धता
Sanskrit (Devanāgarī)
व्योम पश्चिमकलास्थितेन्दु वा पङ्कशेषमिव घर्मपल्वलम् । राज्ञि तत्कुलमभूत्क्षयातुरे वामनार्चिरिव दीपभाजनम् ॥
व्याख्या / Traditional Commentary & Notes Classical Exegesis
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः): व्योमिति॥ राज्ञि क्षयातुरे सति तत्कुलं रघुकुलं पश्चिमकलायां स्थइत इन्दुर्यस्मिंस्तत्कलावशिष्टेन्दु व्योम वा व्योमेव। `वा`शब्द इवार्थे। यथाह दण्डी-`इववद्वायथाशब्दौ` इति। पङ्कशेषं घर्मपल्वलमिव वामनार्चिरल्पशिस्त्रं दीपभाजनं दीपपात्रमिवाभूत् ॥
Canonical CTS URN Reference
Raghuvaṁśam, RV 19.51. Poorvam Open Research Engine (PORE) Corpus.
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