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Ch. 18 RV 18.35
Full Chapter
RV • Chapter 18: Canto 18

RV 18.35

Canonical Ref: RV 18.35
Metrical Form: उपजातिः
Sanskrit (Devanāgarī)
सुते शिशावेव सुदर्शनाख्ये दर्शात्ययेन्दुप्रियदर्शने सः । मृगायताक्षो मृगयाविहारी सिंहादवापद्विपदं नृसिंहः ॥
व्याख्या / Traditional Commentary & Notes Classical Exegesis
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः): सुत इति॥ मृगायताक्षो नृसिंहः पुरुषश्रेष्ठः स ध्रुवसंधिर्दर्शात्ययेन्दुप्रियदर्शने प्रतिपञ्चन्द्रनिभे सुदर्शनाख्ये सुते शिशौ सत्येव मृगयाविहारी सन्, सिंहाद्विपदं मरणमवापत्। व्यसनासक्तिरनर्थावहेति भावः ॥
Canonical CTS URN Reference
Raghuvaṁśam, RV 18.35. Poorvam Open Research Engine (PORE) Corpus.
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