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Ch. 14 RV 14.59
Full Chapter
RV • Chapter 14: Canto 14

RV 14.59

Canonical Ref: RV 14.59
Metrical Form: उपजातिः
Sanskrit (Devanāgarī)
सीता तमुत्थाप्य जगाद वाक्यं प्रीतास्मि ते सौम्य! चिराय जीव । बिडौजसा विष्णुरिवाग्रजेन भ्रात्रा यदित्थं परवानसि त्वम् ॥
व्याख्या / Traditional Commentary & Notes Classical Exegesis
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः): सीतेति॥ सीता तं लक्ष्मणमुत्थाप्य वाक्यं जगाद। किमिति? हे सौम्य साधो! ते प्रीतास्मि। चिराय चिरं जीव। यद्यस्मात्। बिडौजसेन्द्रेण विष्णुरुपेन्द्र इव। अग्रजेन ज्येष्ठेन भ्रात्रा त्वमित्थं परवान् परतन्त्रोऽसि ॥
Canonical CTS URN Reference
Raghuvaṁśam, RV 14.59. Poorvam Open Research Engine (PORE) Corpus.
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