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Ch. 12 RV 12.78
Full Chapter
RV • Chapter 12: Canto 12

RV 12.78

Canonical Ref: RV 12.78
Metrical Form: अनुष्टुप्
Sanskrit (Devanāgarī)
स मारुतिसमानीतमहौषधिहतव्यथः । लङ्कास्त्रीणां पुनश्चक्रे विलापाचार्यकं शरैः ॥
व्याख्या / Traditional Commentary & Notes Classical Exegesis
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः): स इति॥ लक्ष्मणो मारुतिना मरुत्सुतेन हनुमता समानीतया महौषध्या संजिविन्या हतव्यथः सन् पुनः शरैर्लङ्कास्त्रीणां विलापे परिदेवने। `विलापः परिदेवनम्` इत्यमरः (अ.को.1|6|16)। आचार्यकमाचार्यकर्म। `योपधाद्गुरूपोत्तमाद्वुञ्` (पा.5।1।132)इति वुञ्। चक्रे। पुनरपि राक्षसाञ्जघानेति व्यज्यते ॥
Canonical CTS URN Reference
Raghuvaṁśam, RV 12.78. Poorvam Open Research Engine (PORE) Corpus.
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