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Ch. 8 RV 8.77
Full Chapter
RV • Chapter 8: Canto 8

RV 8.77

Canonical Ref: RV 8.77
Metrical Form: वियोगिनी
Sanskrit (Devanāgarī)
मयि तस्य सुवृत्त! वर्तते लघुसंदेशपदा सरस्वती । श्रृणु विश्रुतसत्त्वसार! तां हृदि चैनामुपधातुमर्हसि ॥
व्याख्या / Traditional Commentary & Notes Classical Exegesis
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः): मयीति॥ हे सुवृत्त सदाचार! संदिश्यत इति संदेशः संदेष्टव्यार्थः। तस्य पदानि वाचकानि लघूनि संक्षिप्तानि संदेशपदानि यस्यां सा लघुसंदेशपदा तस्य मुनेः सरस्वती वाक् मयि वर्तते। हे विश्रुतसत्त्वसार प्रख्यातधैर्यातिशय। तां सरस्वतीं शुणु। एनां वाचं हृद्युपधातुं धर्तुं चार्हसि ॥
Canonical CTS URN Reference
Raghuvaṁśam, RV 8.77. Poorvam Open Research Engine (PORE) Corpus.
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