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Ch. 6 RV 6.67
Full Chapter
RV • Chapter 6: Canto 6

RV 6.67

Canonical Ref: RV 6.67
Metrical Form: उपजातिः
Sanskrit (Devanāgarī)
संचारिणी दीपशिखेव रात्रौ यं यं व्यतीयाय पतिंवरा सा । नरेन्द्रमार्गाट्ट इव प्रपेदे विवर्णभावं स स भूमिपालः ॥
व्याख्या / Traditional Commentary & Notes Classical Exegesis
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः): संचारिणीति॥ पतिंवरा सेन्दुमती रात्रौ संचारिणी दीपशिखेव यं यं भूमिपालं व्यतीयायातीत्य गता स स भूमिपालः। स सर्व इत्यर्थः। `नित्यवीप्सयोः` (पा.8।1।4) इति वीप्सायां द्विर्वचनम्। नरेन्द्रमार्गे राजपथेऽट्टाख्यो गृहभेद इव। `स्यादट्टः क्षौममस्त्रियाम्` इत्यमरः (अ.को.2|2|12)। विवर्णभावं विच्छायत्वम्। अट्टस्तु तमोवृतत्वम्। प्रपेदे ॥
Canonical CTS URN Reference
Raghuvaṁśam, RV 6.67. Poorvam Open Research Engine (PORE) Corpus.
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