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Ch. 6 RV 6.25
Full Chapter
RV • Chapter 6: Canto 6

RV 6.25

Canonical Ref: RV 6.25
Metrical Form: उपजातिः
Sanskrit (Devanāgarī)
एवं तयोक्ते तमवेक्ष्य किंचिद्विस्रंसिदूर्वाङ्कमधूकमाला । क्रजुप्रणामक्रिययैव तन्वी प्रत्यादिदेशैनमभाषमाणा ॥
व्याख्या / Traditional Commentary & Notes Classical Exegesis
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः): एवमिति॥ एवं तया सुनन्दयोक्ते सति तं परंतपमवेक्ष्य किंचिद्विस्रंसिनी दूर्वाङ्का दूर्वाचिह्ना मधूकमाला गुहपुष्पमाला यस्याः सा। `मधूके तु गुडपुष्पमधुद्रुमौ` इत्यमरः (अ.को.2|4|27)। वरेण शिथिलप्रयत्नेति भावः। तन्वीन्दुमती। एनं नृमभाषमाणम्। ऋज्व्या भावशून्यया प्रणामक्रिययैव प्रत्यादिदेश परिजहार ॥
Canonical CTS URN Reference
Raghuvaṁśam, RV 6.25. Poorvam Open Research Engine (PORE) Corpus.
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