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Ch. 10 RV 10.16
Full Chapter
RV • Chapter 10: Canto 10

RV 10.16

Canonical Ref: RV 10.16
Metrical Form: अनुष्टुप्
Sanskrit (Devanāgarī)
नमो विश्वसृजे पूर्वं विश्वं तदनु बिभ्रते । अथ विश्वस्य संहर्त्रे तुभ्यं त्रेधास्थितात्मने ॥
व्याख्या / Traditional Commentary & Notes Classical Exegesis
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः): नम इति॥ पूर्वमादौ विश्वसृजे विश्वस्रष्ट्रे तदनु सर्गानन्तरं विश्वं विभ्रते पुष्णते। अथ विश्वस्य संहर्त्रे। एवं त्रेधा सृष्टि-स्थिति-संहारकर्तृत्वेन स्थित आत्मा स्वरूपं यस्य तस्मै ब्रह्म-विष्णु-हरात्मने तुभ्यं नमः ॥
Canonical CTS URN Reference
Raghuvaṁśam, RV 10.16. Poorvam Open Research Engine (PORE) Corpus.
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