हो जाता जीवन धन्य-धन्य
इस कविता का मुख्य भाव संकट के समय मिलने वाली राहत, संतोष और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण है। कवि यह दर्शाना चाहते हैं कि जब मनुष्य जीवन के संघर्षों, दुखों, अभावों और विकृतियों से घिरकर पूरी तरह हताश हो जाता है, तब जीवन में मिलने वाली थोड़ी सी भी राहत (चाहे वह सुख का समंदर हो, वर्षा हो, सच्चे संबंध हों या अंतरात्मा की पुकार हो) जीवन को कृतज्ञता और धन्य-धन्य भाव से भर देती है। यह कविता प्रतिकूल परिस्थितियों में भी आशा की किरण तलाशने की प्रेरणा देती है।