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विक्रमसंवत् २०८३
शनिवासरः · ३१ अक्तूबर २०२६
आनुपूर्वी संस्कृतम्
✦ अतीतानागतयोः सन्धौ ✦
आगामी कार्यक्रमः 31 Oct 2026
Exploring the Place of Devotion: Siting and Experiencing Divinity in Bengal-Vaishnavism
Sukanya Sarbadhikary
पाण्डुलिपिः प्रेष्यताम्
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সাহিত্যিক ও চিন্তক

डॉ. प्रकाश कुमार पोद्दार

आनुपूर्व्यां साहित्य-, दर्शन- विचारप्रधानरचनानां लेखकाः। अधः लेखकेन प्रकाशिताः सर्वाः रचनाः सङ्कलिताः सन्ति।

सक्रियशोधनम्: लेखकः: डॉ. प्रकाश कुमार पोद्दार × सर्वं शोधनम् अपसारयतु

डॉ. प्रकाश कुमार पोद्दार इत्यस्य रचनाः

1 रचनाः उपलभ्यन्ते
हो जाता जीवन धन्य-धन्य
मुक्तपठनम्
कविता 2 निमेषाः

हो जाता जीवन धन्य-धन्य

इस कविता का मुख्य भाव संकट के समय मिलने वाली राहत, संतोष और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण है। कवि यह दर्शाना चाहते हैं कि जब मनुष्य जीवन के संघर्षों, दुखों, अभावों और विकृतियों से घिरकर पूरी तरह हताश हो जाता है, तब जीवन में मिलने वाली थोड़ी सी भी राहत (चाहे वह सुख का समंदर हो, वर्षा हो, सच्चे संबंध हों या अंतरात्मा की पुकार हो) जीवन को कृतज्ञता और धन्य-धन्य भाव से भर देती है। यह कविता प्रतिकूल परिस्थितियों में भी आशा की किरण तलाशने की प्रेरणा देती है।