Abstract
<jats:p>भारत एक कल्याणकारी राज्य है और यह अपने सभी नागररकों कों सविेष रूप से सामासजक दृसि से सपछडे, स सवधाहीन तथा वंसचत बच्चों के कल्याण के सलए वचनबद्द है । सभी को संसवधान प्रदत्त सिक्षा के मौसलक असधकारों से आच्छासदत करते हुए िैसक्षक सवषमताएं समाप्त कर सिक्षा के अवसरों को सवयस लभ बनाना चाहता है । इसके सलए सरकार के साथ समाज द्वारा भी प्रसतबद्दता के साथ प्रयत्नों की आवश्यकता पडती है । इसी कडी में सिक्षािास्त्र सवभाग महारानी लाल क ुँवरर महासवद्यालय बलरामप र तथा उत्कषय फाऊंडेिन गोंडा एवं भारत डायनासमक्स सलसमटेड के संय क्त तत्वाधान में दो सदवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “वंसचत बालकों की सिक्षा : च नौसतयां समस्याएं एवं भावी सनयोजन” िीषयक पर आयोसजत सकया गया तथा संगोष्ठी में व्यापक सवचार सवमिय कर उन बालकों में मनोवैज्ञासनक सवश्वास, अपनापन, स रक्षा, संपकय, सामूसहक भावना आसद ग णों का सवकास करने हेत साथयक तत्वों को पहचान की कोसिि हुई । इस संगोष्ठी में सवसभन्न सवद्वानों, सिक्षकों , िोधकतायओं और नीसत सनमायताओ ने अपने अन भव और िोध के आधार पर वंसचत बालकों की च नौसतयां और समस्याओं के सलए भावी योजनाएं प्रस्त त की। इस संगोष्ठी में प्रस्त त िोध पत्रों में म ख्यत: वंसचत बच्चों की भारत में सिक्षा , वंसचत बालकों की सिक्षा में सासहत्य एक उपकरण, समावेिी सिक्षा, िैसक्षक रणनीसत, िासकीय योजनाएं, राष्ट्रीय सिक्षा नीसत 2020 में वंसचत बच्चों की सिक्षा की सस्थसत को आसद पर चचाय केंसित रही वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण एवं िहरी वंसचत बालकों पर भी ध्यान केंसित सकया गया। न्यासयक ससियता, वैश्वीकरण , बाल श्रम, सवद्यालय छोडने की समस्या के साथ बासलकाओं की सिक्षा और उनके सलए स धारात्मक उपायों पर भी सवचार प्रस्त त सकया गया । आसदवासी, ग्रामीण बसस्तयों में सिक्षा सविेष रूप से थारू जनजासत की वंसचत बालकों की सिक्षा पर चचाय करते हुए उनके सलए नवाचरी उपाय भी स झाए गए बासलका सिक्षा एवं पोषण में असमानता पर सवचार करते हुए उनके सिसक्तकरण पर ध्यान आकृि करते हुए सडसजटल सिक्षा की उन तक पहुंच की सस्थसत को भी जानने एवं समझने का प्रयास सकया गया । इस संगोष्ठी में प्रस्त त िोध पत्रों को संकसलत कर एक प स्तक “वंचित बालकों की शिक्षा : मुद्दे एवं मार्ग” के रूप में प्रकासित की जा रही है ।</jats:p>